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जब दुनिया में महंगाई की मार हो, कच्चे माल के दाम बढ़ रहे हों और पश्चिम एशिया की जंग से बाजार डरा हुआ हो तब अगर कोई कंपनी अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दे, तो उसे नोटिस करना जरूरी है। टीवीएस मोटर ने वित्त वर्ष 2025-26 की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के नतीजे पेश किए हैं और हर मोर्चे पर कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। मुनाफा बढ़ा, बिक्री बढ़ी, इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग उछली और पूरे साल का हिसाब भी अब तक का सबसे बेहतर रहा।
चौथी तिमाही में क्या हुआ?
जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में टीवीएस मोटर का एकीकृत शुद्ध लाभ 17.5 फीसदी बढ़कर 819.55 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह 697.51 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आमदनी भी 30 फीसदी से ज्यादा उछलकर 15,052 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले साल 11,542 करोड़ रुपये थी। यह सिर्फ संख्याएं नहीं हैं यह इस बात का सबूत है कि कंपनी का कारोबार तेजी से फैल रहा है और उसकी पकड़ बाजार में मजबूत हो रही है।
बिक्री का जादू : हर श्रेणी में उछाल
इस तिमाही में टीवीएस मोटर ने दोपहिया और तिपहिया वाहनों की कुल बिक्री में 28 फीसदी की बढ़त दर्ज की। कुल 15.60 लाख गाड़ियां बिकीं, जबकि पिछले साल इसी समय 12.16 लाख गाड़ियां बिकी थीं।
मोटरसाइकिल बनाम स्कूटर : एक दिलचस्प मुकाबला
इस तिमाही में एक खास बात हुई। स्कूटरों की बिक्री मोटरसाइकिलों से आगे निकल गई। मोटरसाइकिल बिक्री 23 फीसदी बढ़कर 6.93 लाख रही, लेकिन स्कूटरों ने 32 फीसदी की छलांग लगाई और 6.60 लाख यूनिट बिके। यह अंतर भले ही छोटा दिखे, लेकिन यह बताता है कि शहरों में स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है खासकर उन घरों में जहां महिलाएं और युवा पहली गाड़ी खरीद रहे हैं।
तिपहिया वाहनों का धमाका
तिपहिया वाहनों की बिक्री में सबसे जबरदस्त उछाल आई 65 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 60,000 यूनिट पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल 37,000 यूनिट थी। यह दिखाता है कि छोटे व्यापारियों और माल ढुलाई के लिए तिपहिया वाहनों की मांग जोर पकड़ रही है।
इलेक्ट्रिक वाहन : असली खेल यहां हो रहा है
इस पूरी रिपोर्ट में सबसे रोमांचक आंकड़ा इलेक्ट्रिक वाहनों का है। चौथी तिमाही में टीवीएस के इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 51 फीसदी उछलकर 1.15 लाख यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल इसी तिमाही में यह 76,000 यूनिट थी। यानी हर महीने करीब 38,000 से 40,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिक रहे हैं। कंपनी का कहना है कि यह संख्या जल्द ही 50,000 प्रति महीने तक पहुंचने का लक्ष्य है। यह वृद्धि बताती है कि भारत में बिजली से चलने वाली गाड़ियों को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। पेट्रोल के बढ़ते दाम, सरकारी प्रोत्साहन और बेहतर होते उत्पाद इन तीनों ने मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों की राह आसान की है।
पूरे साल का हिसाब : अब तक का सबसे बड़ा
सिर्फ एक तिमाही नहीं, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की तस्वीर भी बेहद उजली है। पूरे साल का एकीकृत शुद्ध लाभ 34 फीसदी बढ़कर 3,186 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल 2,380 करोड़ रुपये था। पूरे साल की आमदनी 56,069 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल के 44,089 करोड़ रुपये से 27 फीसदी ज्यादा है। सबसे बड़ी बात पूरे वित्त वर्ष में कुल 58.89 लाख दोपहिया और तिपहिया वाहन बिके। यह टीवीएस के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी सालाना बिक्री है। पिछले साल यह संख्या 47.44 लाख थी यानी एक साल में 24 फीसदी की छलांग।
मुनाफे की मोटाई : मार्जिन की भी खबर अच्छी है
कंपनी ने न सिर्फ ज्यादा बेचा, बल्कि ज्यादा कमाया भी। चौथी तिमाही में परिचालन मुनाफे का अनुपात यानी ईबीआईटीडीए मार्जिन 13.1 फीसदी रहा, जो पिछले साल के सामान्यीकृत 12.5 फीसदी से बेहतर है। यह 60 आधार अंकों का सुधार है जो बताता है कि कंपनी अपनी लागत पर नियंत्रण रखते हुए आगे बढ़ रही है। शेयरधारकों को तोहफा
कंपनी के बोर्ड ने प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 12 रुपये का अंतरिम लाभांश घोषित किया है। इस मद में कुल 570 करोड़ रुपये का भुगतान होगा। यह निवेशकों के प्रति कंपनी की जिम्मेदारी और आत्मविश्वास दोनों दर्शाता है। आगे का रास्ता विस्तार की तैयारी
रिकॉर्ड बिक्री के बाद कंपनी अब अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के एन राधाकृष्णन ने कहा कि अगले 12 महीनों में 15 लाख अतिरिक्त इकाइयों की उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी। इसके लिए कंपनी ने करीब 3,500 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च तय किया है। इसमें से 2,000 करोड़ रुपये नए उत्पादों के शोध और विकास पर खर्च होंगे और 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर। कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 70 लाख से बढ़ाकर 83 लाख यूनिट सालाना करने का लक्ष्य है। चुनौतियां भी हैं : अनदेखा नहीं किया जा सकता
यह सब जानते हुए भी कंपनी ने माना कि आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। पश्चिम एशिया की जंग से कच्चे माल के दाम बढ़े हैं इस्पात, एल्यूमीनियम और रसायनों की कीमतें चढ़ी हैं। इससे कंपनी के कुल खर्च में 35 फीसदी की वृद्धि हुई। कंपनी ने कुछ गाड़ियों की कीमतें बढ़ाकर इस बोझ का करीब 35 फीसदी हिस्सा ग्राहकों पर डाला है। बाकी को लागत में कटौती और बेहतर उत्पाद मिश्रण से संभाला जा रहा है। अगले वित्त वर्ष में दोपहिया उद्योग की वृद्धि दर एक अंक में रहने का अनुमान है पिछले साल 26 फीसदी की जोरदार बढ़त के बाद यह स्वाभाविक भी है।
निष्कर्ष
टीवीएस मोटर की यह रिपोर्ट सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है। यह भारत के दोपहिया बाजार की ताकत की कहानी है, जो महंगाई और वैश्विक उथलपुथल के बावजूद थमने को तैयार नहीं। इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार, स्कूटरों की बढ़ती मांग और रिकॉर्ड बिक्री यह सब मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जो निवेशकों, ग्राहकों और उद्योग सबके लिए उत्साहजनक है।